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मध्य प्रदेश पंचायती राज व्यवस्था के बहुत उपयोगी नोट्स हिंदी में

2 years ago | afrex

मध्य प्रदेश पंचायती राज व्यवस्था के बहुत उपयोगी नोट्स हिंदी में

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म.प्र में 73 वे संविधान संशोधन (1992) को लागू करने के लिए 30 दिसम्बर 1993 को म.प्र पंचायती राज अधिनियम 1993 रखा गया , जिसे 25 जनवरी 1994 को पारित किया गया और 20 अगस्त, 1994 को लागू किया गया ! 

इस अधिनियम के अनुसार पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर है। सभी तीनों स्तरों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है ! जिनका विवरण निम्न प्रकार है –


ग्राम पंचायत ( Gram Panchayat )

  • इसकी सदस्य संख्या न्यूनतम 10 व अधिकतम 20 हो सकती है !
  • 1000 से अधिक आबादी वाले गाॅव में एक ग्राम पंचायत गठित की जायेगी ।
  • वर्तमान म.प्र. में ग्राम पंचायतो की संख्या 23,012 है।
  • मुखिया सरपंच होता है।
  • सरपंच , पंच ओर उपसरपंच और ग्राम के सदस्य मतदाता होते है।
  • पंचायत ,सचिव , पंचायत द्वारा नियुक्त शासकीय कर्मचारी होता है।
  • सरपंच, उपसरपंच को अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है।
  • इसका मुखिया सरपंच व सदस्य पंच प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा व उप-सरपंच अप्रत्यक्ष रूप से पंचों द्वारा निर्वाचित होते है।   
  • ग्राम पंचायते अपने गाॅंव की सफाई, पेयजल व्यवस्थ, प्रकाष व्यवस्था, आॅंगनवाड़ियो का संचालन, ग्रामीण विकास कार्यक्रमो की निगरानी आदि का कार्य करती है।
  • Right To Recall का अधिकार जनता को दिया जाता है। 
  • Right To Recall में सरपंच निर्वाचित होने के 2 बर्ष के बाद 2/3 बहुमत द्वारा उसे हटाया जा सकता है ! इसका प्रथम प्रयोग शहडोल जिले की अनुपपूर तहसील का पल्लविका पटेल को इसी अधिकार द्वारा जनता द्वारा हटाया गया था। म.प्र. पहला राज्य है जिनसे स्थानीय निकायो में Right To Recall का प्रावधान किया है। 
  • वर्तमान में पंचायतो की सबसे बड़ी समस्या वित की कमी है।

जनपद पंचायत ( Janpad Panchayat )

  • इसकी सदस्य संख्या न्यूनतम 10 व अधिकतम 25 हो सकती है !
  • वर्तमान मध्यप्रदेश में 313 जनपद पंचायतें हैं !
  • यह मध्य स्तर है , जिसका गठन विकासखण्ड पर होता है।
  • 5 हजार से अधिक आबादी वाले विकासखण्ड में एक जनपद पंचायत का गठन किया जाता है।
  • सदस्यो का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा जबकि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से सदस्यो द्वारा किया जाता है।
  • इसके अतिरिक्त इसके पदेन सदस्य के रूप में, सांसद , सरपंच ओैर विधायक होते हे ! 
  • सहकारी बैकों का अध्यक्ष सहयोजित सदस्य होता है।
  • जनपद पंचायत का मुख्य प्रशासकीय अधिकारी CEO होता जो राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित अधिकारी होता है ! 

जिला पंचायत ( Jila Panchayat )

  • इसकी सदस्य संख्या न्यूनतम 10 व अधिकतम 35 हो सकती है !
  • वर्तमान मध्यप्रदेश में 51 जिला पंचायतें हैं !
  • 50 हजार या अधिक आबादी वाले क्षेत्र में एक जिला पंचायत का गठन किया जाता है !
  • सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से व अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का निर्वाचन सदस्यो द्वारा अप्रत्क्ष रूप से किया जाता है।
  • इसके पदेन सदस्य के रूप मे जनदप पंचायत के अध्यक्ष , विधायक व सांसद होते है।
  • कलेक्टर भी पदेन सदस्य होता है।
  • अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का निर्वाचन सदस्यो द्वारा अप्रत्क्ष रूप से किया जाता है।
  • कार्यकारी अधिकारी एक IAS होता है। जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।

पंचायती राज व्यवस्था के महत्वपूर्ण तथ्य

  • 26 जनवरी 2001 से ग्राम स्वराज योजना लागू की गई।
  • चुनाव संबंधी कार्यों के लिए 19 जनवरी 1994 को मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग का गठन किया गया। जो इन तीनों स्तरों के चुनाव का कार्य करवाता है।
  • मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग के प्रथम अध्यक्ष एमबी लौहानी थे।
  • मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग के वर्तमान अध्यक्ष आर. परशुराम हैं।
  • मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग के वर्तमान सचिव सुनीता त्रिपाठी हैं।
  • पंचायतों को राज्य शासन से वित्त उपलब्ध करानें के लिए मध्यप्रदेश वित्त आयोग का गठन प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल पर किया जाता है।
  • मध्यप्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने पांचवें राज्य वित्त आयोग का गठन 2017 में किया है। 
  • आयोग के अध्यक्ष के तौर पर वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी को अध्यक्ष और मिलिंद वाईकर को सदस्य सचिव की भूमिका दी गई है।
  • मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत मध्य प्रदेश में प्रथम चुनाव मार्च-अप्रैल 1994 में हुए थे।
  • तीनों स्तरों पर एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण की भी व्यवस्था की गई है।
  • 73वां संविधान संशोधन लागू करने वाला मप्र प्रथम राज्य था।
  • 1907 में सर्वप्रथम दतिया में नगरपालिका का गठन किया गया था। 
  • 1929 में इंदौर, ग्वालियर एवं नरसिंहगढ़ में पंचायतें स्थापित की गई।
  • 25 जनवरी को मतदाता दिवस मनाया जाता है।
  • पंचायती राज में 29 विषय सम्मलित हैं।
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