World of Education Global Organization

एक प्रोफेसर की अपनी क्लास मे सुनाई बहुत ही अच्छी कहानी जो हमारे जीवन पर भी लागू होती है

3 years ago | 3 years ago | afrex

एक प्रोफेसर की अपनी क्लास मे सुनाई बहुत ही अच्छी कहानी जो हमारे जीवन पर भी लागू होती है

Via


एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे–

एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी.

कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया.

जहाज पर एक युवा दम्पति थे.

जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गयास नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है.

इस मौके पर आदमी ने औरत को धक्का दिया और नाव पर कूद गया.

डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा.

अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ?

ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you !

प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था,

प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ?

वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना !

प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ?

लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी.

प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है !

प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकी जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया.

कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली.

डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उसके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे....

ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया.

उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था. लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा.

जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की, तो पूरी क्लास में शांति थी.    





इस संसार में कई सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं.

इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता. – कलह होने पर जो पहले माफ़ी मांगे, जरुरी नहीं उसी की गलती हो. हो सकता है वो रिश्ते को बनाये रखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझता हो.

जो लोग आपकी मदद करते हैं, जरुरी नहीं वो आपके एहसानों के बोझ तले दबे हों. वो आपकी मदद करते हैं क्योंकि उनके दिलों में दयालुता और करुणा का निवास है.

किशोरावस्था और जवानी में माता पिता की डांट, रोकटोक बहुत बुरी लगती है परन्तु परिपक्व होने पर वही बातें याद करने पर अक्षरशः सही लगती हैं.

आजकल जीवन कठिन इसीलिए हो गया है क्योंकि हमने लोगो को समझना कम कर दिया है और फौरी तौर पर जानना शुरू कर दिया है.

बात वर्तमान परिवेश में वाट्सऐप और फेसबुक संदेशों पर भी लागू होती है।

सोशल मीडिया पर प्रेषित पोस्ट को सम्पूर्ण सत्य मानते हुए अपना नजरिया और पूर्वाग्रह बनाने से बचें. जो दिखता है वही हर बार सही नहीं होता है....

Recommended
Please Like and Share...