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महात्मा गाँधी की 5 प्रेरित और अनसुनी कहानिया - MAHATMA GANDHI 5 UNTOLD STORIES IN HINDI

3 years ago | motivation

महात्मा गाँधी की 5 प्रेरित और अनसुनी कहानिया - MAHATMA GANDHI 5 UNTOLD STORIES IN HINDI

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2 अक्टूबर 1869 को जन्मे महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi ने अपने पूरे जीवन भर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले और और लोगो को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया और अपने सत्य और अहिंसा के बलबूते भारत को आजादी दिलाई भले ही 30 जनवरी 1948 को महात्मा गाँधी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi द्वारा दिखाए गये सत्य और अहिंसा के मार्ग आज भी लोगो के लिए अनुकरणीय है

तो आईये जानते है महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi के जीवन की अनसुनी कहानिया / MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY जो की कही न कही हम सभी को उनके जीवन से एक प्रेरणा और सीख मिलती है


महात्मा गाँधी की अनसुनी कहानि ( MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY) 1


महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi जब बचपन में अपने पढाई में बहुत ही कमजोर थे लेकिन उन्हें पुस्तके पढने का बहुत ही शौक था जब भी महात्मा गाँधी को कोई अच्छी पुस्तक मिलती तो उसे खूब मन लगाकर पढ़ते थे एक बार महात्मा गाँधी को एक ऐसा पुस्तक मिला जिसमे श्रवण कुमार और उनके माता पिता के सेवा की कहानी थी किस प्रकार श्रवण अपने प्राणों की आहुति देकर भी अपने माता पिता की सेवा करते है जिसे पढकर महात्मा गाँधी बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने निश्चय किया की वे भी श्रवण कुमार की तरह अपने माता पिता की सेवा करेगे और जब उन्हें अपने पड़ोस में हरिचन्द्र के जीवन पर आधारित नाटक को देखने का मौका मिला हरिश्चन्द्र के नाटक को देखकर महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi के आखो में आशु आ गये और उन्होंने जीवन भर सत्य की राह पर चलने की कसम खायी चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी कष्ट क्यू न उठाने पड़े और महात्मा गाँधी ने आजीवन सत्य के राह पर चले

अन्य बालको की तरह महात्मा गाँधी भी बचपन में बहुत ही डरपोक स्वाभाव के थे रात के अँधेरे में अपने घर में जाने से डरते थे और अगर उन्हें भूत प्रेत की कहानिया सुना दिया जाता था तब गांधीजी बहुत ही भयभीत हो जाते थे ऐसा सब देखकर उनके घर में काम करने वाली नौकरीं रम्भा ने समझाया की जब भी तुम्हे डर लगे राम का नाम लेना सब डर भाग जायेगा इस तरह गांधीजी बचपन से अपने जबान पर राम का नाम रटने लगे और अपने डर को दूर किया और राम के नाम से इतना प्रेम हो गया था की अपने मरने के आखिरी क्षण में भी उनका आखिरी शब्द राम ही था



महात्मा गाँधी की अनसुनी कहानि ( MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY) 2


एक बार गाँधीजी के स्कूल में निरिक्षण करने बड़े अधिकारी आये और फिर उकने क्लास के लडको को कुछ अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए सबने सही लिखा लेकिन Gandhiji ने एक शब्द गलत लिख दिया था उनके अध्यापक ने इशारे से उस शब्द को सही करने को कहा लेकिन महात्मा गाँधी तो मन के सच्चे थे सभी लडको के सभी शब्द सही निकले लेकिन महात्मा गाँधी का एक शब्द गलत लिखा हुआ था फिर बाद में जब उनके अध्यापक ने ऐसा जब करने को बताया था फिर भी नही किया तो गांधीजी ने बोला जब मै गलत लिख ही दिया तो किसी के बताने से वो कैसे सही हो सकता है जब तक वो मुझे खुद सही न करने आये और अगर मै आपके बताने पर लिख भी देता तो मै निरीक्षक के सामने खुद को झूठा बना लेता इसलिए ऐसा करने को मेरा मन न हुआ शायद इसी तरह महात्मा गाँधी के मन में सत्य का विचार था जो लोगो के लिए प्रेरणा बन जाती है


महात्मा गाँधी की अनसुनी कहानि ( MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY) 3


एक बार अपने बुरे दोस्त की कुसंगति में आने पर महात्मा गाँधी बीडी की लत गयी और उस लड़के के कहने पर महात्मा गाँधी चोरी छिपे मांस भी खाने लगे क्यूकी महात्मा गाँधी के घर पर सभी शाकाहारी थे और इस तरह अपने गलत आदत के कारण उन्हें चोरी करने की भी आदत पद गयी क्यूकी इन सबके लिए पैसो की आवश्कयता पड़ती थी और फिर महात्मा गाँधी ने धीरे धीरे कर्ज भी लेना शुरू कर दिया था लेकिन अपने इस कर्ज को चुकाने के लिए अपने बड़े भाई के सोने के कड़े में एक टुकड़ा चुराकर बेच दिया और और अपना कर्जा तो चूका दिया लेकिन महात्मा गाँधी का मन खुद को इस अपराध के लिए मान नही रहा था और अपने गलतियों को अपने पिता के सामने पत्र के माध्यम से बता दिया यह सब पढकर उनके पिताजी कुछ भी बोल न सके और महात्मा गाँधी द्वारा लिखा गया पत्र फाडकर फेक दिया यह सब देखकर महात्मा गाँधी फूटफूटकर रोने लगे और प्रण लिया की आज के बाद वे सारे बुरे काम छोड़ देंगे और इस प्रकार महात्मा गाँधी जो भी शपथ लेते उसपर हमेसा अडिग रहते थे


महात्मा गाँधी की अनसुनी कहानि ( MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY) 4


महात्मा गाँधी जब अपनी पढाई पूरी कर लिया तो उन्हें वकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका / South Africa जाने का मौका मिला दक्षिण अफ्रीका में गोरे अंग्रेज भारतीयों को कुली कहकर पुकारते थे और भारतीयों के साथ वहा बहुत बुरा बर्ताव करते थे जिसका सामना गांधीजी को भी करना पड़ा था जब वे एक दिन रेलगाड़ी के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठकर जा रहे थे तो उस डिब्बे में कुछ अंग्रेज प्रवेश किये और उसने शिकायत किया की इस कुली को दुसरे डिब्बे में बैठाया जाय लेकिन गांधीजी ने अपने इस डिब्बे की टिकट दिखाया तो भी उस रेल के कर्मचारी नही माने और महात्मा गाँधी के सामान को बाहर उठाकर फेक दिया और गांधीजी को धक्के मारकर बहार कर दिया गया जिसे देखकर महात्मा गाँधी का जीवन ही बदल गया और उन्होंने प्रण लिया ली अंग्रेजो के अत्याचार को और नही सहेगे और फिर यही से उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन की शुरुआत की


महात्मा गाँधी की अनसुनी कहानि ( MAHATMA GANDHI UNTOLD STORY) 5


1916 की बात है काशी जो की अब वाराणसी के नाम से जाना जाता है उस समय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय / Banaras Hindu University (BHU) के शिलान्यास के दौरान दिल्ली से वायसराय गये थे जिनमे गांधीजी को भी बुलाया गया और कार्यक्रम के दौरान महात्मा गाँधी की ने भारतीयों के सामने अपना पहला भाषण दिया वो भी अंग्रेजी में, जब महात्मा गाँधी ने भाषण की शुरुआत किया तो उनका पहला शब्द था बड़े शर्म की बात है अपने ही देश में अपने लोगो के सामने मुझे हिंदी न बोलकर अंग्रेजी में बोलना पड़ रहा है ऐसा बोलना वहा मौजूद अंग्रेजो के गुस्से के आग में घी डालने के बराबर था लेकिन महात्मा गाँधी बिना किसी से डरे अपने विचारो को स्वतंत्र रूप से बोलते रहे और उनका भाषण सबका सुनना था की बस लोगो के दिलो में अंग्रेजो के प्रति गुस्सा फूट पड़ा था जो आगे चलकर आजादी की क्रांति बन गयी

भले ही महात्मा गाँधी आज हमारे बीच नही है लेकिन द्वारा दिखाए गये सत्य और अहिंसा का मार्ग सबके लिए एक प्रेरणा का श्रोत है आप सभी को गांधीजी के जीवन की ये कहानिया / Untold Stories कैसा लगा प्लीज wedugo पर रजिस्टर कर कमेंट करे 

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