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एक मर्तबा मुहम्मद (सल्ल.) को किसी ने चेलेंज किया

2 years ago | islamic

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एक मर्तबा मुहम्मद (सल्ल.) को किसी ने चेलेंज किया 

कब तक हम कमज़ोरों को दावत देते रहोगे मक्का का जो पहलवान है उसको दावत क्यों नही देते 

मक्का का पहलवान जिनका नाम था हज़रत रुकाना बहोत जबरदस्त पहलवान 

रुकाना के बारे में लिखा है वो इतने ज़बरदस्त पहलवान थे अगर एक जगह बेठ जाते तो 40 आदमी मिल कर भी उनको उठा नही सकते थे 

किसी ने आ कर कहा कब तक हम कमज़ोरों को दावत देते रहोगे अगर आप पैगम्बर है आप का दिन सच्चा है अगर नबी है तो रुकाना को जा कर दावत दो 

प्यारे आक़ा मक्का में रुकाना के दरवाज़े पर गए दरवाज़ा खटखटाया अंदर से रुकाना ने पूछा कोंन आप ने फरमाया में मुहम्मद में अल्लाह का रसूल हु एक बार कलमा पढ़ले तू कामीयाब हो जाएगा 

वो तो पहलवान बोला कलमा पढू? ना ना कलमा नही पढूंगा में तो अपनी ताकत के बलबूते पर जीता हु में कलमा नही पढूंगा 

नबी ने बहोत समझाया तो रुकाना बोला अगर तू नबी है तो कुश्ती का एक मुक़ाबला हो जाये अगर में तूझे पछाड़दु तो तू मेरी तरह बन जाना अगर तू मुझे पछाडदे तो में कलमा पढलूँगा

आका मोहम्मद (सल्ल.) ने फरमाया मुझे ये भी मंज़ूर है 

इस बहाने कम अज़ कम मेरा उम्मती जहन्नम से आज़ाद तो हो जाएगा 

जब रुकाना ने देखा अच्छा में मक्का का पहलवान और ये मुझे चैलेंज दे रहा तो रुकाना ने कहा अभी नही अभी नही अब तो मैदान में मुक़ाबला होगा और सारे लोग जमा होंगे 

चुनांचे एलान हुवा सारा मक्का जमा हो गया पूरा मैदान खचाखच भर गया

आक़ा मुहम्मद (सल्ल.) ने रुकाना से कहा ए रुकाना अब ये मुक़ाबला शुरू होगा 

रुकाना ने कहा मुक़ाबला तो करेंगे पहले ये बताओ आप मुझपे पहले हमला करेंगे या पहले में हमला करूँगा नबी की आंखों में आंसू आये फ़रमाया ना में तुझपे हमला नही करूँगा कोई नबी अपने उम्मती पे हमला नही किया करता 

इस लिए तू मुझपे हमला करले में उसके लिए तैयार हूं

अब वो रुकाना तो रुकाना पहलवान थे सारा मक्का उनके साथ मे था सारे मर्द और सारी औरतो ने उसके नाम की आवाजे लगाई वो रुकाना दौड़ता दौड़ता आया करीब था के नबी पे हमला करता जैसे ही उछला नबी ने रहमत वाले हाथो को फैला दिया वो उछल के नबी की गौद में आ गया नबी ने बड़े प्यार से उसे ज़मीन पे रखा ले रुकाना तू हार गया और में जीत गया

वो रुकाना चकरा गया के ये क्या हुवा अचानक रुकाना कहता मुहम्मद ये मेरी समझ मे नही आया मुझको एक और चांस देदो ना इस लिए के मेने हज़ारो कुश्तिया लड़ी मगर ऐसी कुश्ती तो मैने आज तक नही लड़ी नबी ए (सल्ल.) ने फरमाया 

रुकाना जा तुझे दूसरा मौका भी देता 

हज़रत रुकाना फिर दौड़ते दौड़ते आये 

फिर उछले नबी ने रहमत वाले हाथो को फिर से फैलाया रुकाना उछल के गौद में आ गए नबी ने फिर से प्यार से ज़मीन पे रखा फ़रमाया रुकाना तू फिर हार गया में जीत गया 

रुकाना ने कहा नही समझ के सब बाहर है एक और चांस आखरी चांस

जब तीसरी बार हज़रत रुकाना आये फिर से मोहम्मद (सल्ल) ने इसी तरह अपने मुबारक हाथो को रखा रुकाना उछले और उछलने के बाद नबी की गौद में नबी ने बड़े प्यार से ज़मीन पर रखा 

हज़रत रुकाना को ज़मीन पर रखना था रुकाना ने एलान फ़रमाया 

अशहदुअल्लाह इल्लाह इल्लल्लाह व अशहदु अन्ना मुहम्मदर रसूलल्लाह

अब सारा मक्का रुकाना को कहने लगा 

नाम डूबा दिया मिट्टी में मिला दिया 

कलमा पढ़ लिया तूने तू मक्के का पहलवान तू मक्के का जांबाज़ तू मक्के का इतना बहादुर और तूने कलमा पढ़ लिया

हज़रत रुकाना ने फरमाया ए मक्का वालो मेने कलमा इस लिए नही पढ़ा के में कुश्ती में तीन बार हार गया 

कहा मेने तो इस लिए कलमा पढ़ा के बहोत कुश्तिया लड़ा हु बड़े बड़े मैदानों में गया हूं लेकिन हमारा ये दस्तूर है जब सामने वाला कंट्रोल करता है तो ज़ोर से ज़मीन पे पटकता है में तीन मर्तबा नबी के कंट्रोल में आया वो चाहते तो मुझे ज़ोर से ज़मीन पे पटकते लेकिन अल्लाह की कसम वो मुझे ऐसे ज़मीन पर रखते थे जैसे कोई शफ़क़त करने वाली माँ अपने दूध पीते बच्चे को ज़मीन पे रखती है 

ए मक्का वालो तुम्हे क्या मालूम जब में पहली मर्तबा दौड़ा था उनके चेहरे से वो नूर उठ रहा था जो आसमान की तरफ जा रहा था में उसी वक़्त समझ गया ये किसी मामूली इंसान का चेहरा नही ये तो नबूवत वाला चेहरा है उसी वक़्त मेरे दिल ने कहा ये झूठा नही हो सकता ये तो नबी के सिवा और कुछ नही हो सकता।।

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